अनूप राजपूत
सीतापुर मछरेहटा कलश स्थापना के साथ ही शक्ति उपासना का महापर्व शारदीय नवरात्र शुरू हो गया। सनातन धर्म की संस्कृति में शक्ति उपासना का वर्णन वैदिक काल से लेकर पुराणों और शास्त्रों में विस्तार से मिलता है। श्रीमद्देवीभागवत महापुराण में भगवती दुर्गा के नौ स्वरूपों तथा लोक कल्याण के लिए महिषासुर, शुंभ और निशुंभ जैसे असुरों का संहार करने वाली मां दुर्गा को परम शक्ति के रूप में वर्णित किया गया है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार शारदीय नवरात्र का विशेष धार्मिक महत्व है।
क्षेत्र के देवी मंदिरों में रविवार को कलश स्थापना के साथ मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। गांव-गांव में श्रद्धालुओं ने पूजन-अर्चन के साथ नवरात्र व्रत का शुभारंभ किया। नवरात्र के प्रथम दिन मंदिरों में सुबह से ही भक्तों की आवाजाही शुरू हो गई।
क्षेत्र के प्रसिद्ध भारासेनी माता मंदिर के दरबार को आकर्षक ढंग से सजाया गया। भोर से ही श्रद्धालु मां के दर्शन करने के लिए मंदिर पहुंचने लगे। जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया, मंदिर परिसर में भक्तों की भीड़ बढ़ती गई। श्रद्धालुओं ने मां के चरणों में शीश झुकाकर परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
मंदिरों में भक्ति और आस्था का माहौल देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना कर मां दुर्गा से परिवार और समाज के कल्याण की प्रार्थना की। वहीं, शांति व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से क्षेत्र के प्रमुख देवी मंदिरों में पुलिस बल तैनात रहा।